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2026年08月15日

# 井枝尼理出亜 ## 零番地に現れる女


# 井枝尼理出亜

## 零番地に現れる女

徹が井枝尼理出亜を描いたとき、彼女はまだ一枚の絵にすぎなかった。

長い黒髪。古代の女王の面影。舞台を降りた女優の疲れ。彼女の足元には、ぼろぼろの聖書と『資本論』が置かれていた。

徹がその絵をSNSへ投稿すると、理出亜は彼の手を離れた。

工場、学校、裁判所、港湾、山村、教会、オンラインゲーム。異なる国の人々が同じ名を名乗り、井枝尼理出亜は世界のいたるところに現れた。

ある夜、徹の画面に、どの国にも属さない黒い点が現れた。

〈零番地〉。

そこは先進国でも第三世界でもなかった。豊かな都市で眠れない者、戦争から逃れた先で声を失った者、診断名によって助けられながら、その名に閉じ込められた者たちが住む、地図にない場所だった。

画面には四つの選択肢が示された。

〈闘う〉
〈愛する〉
〈奏でる〉
〈聴く〉

徹が〈聴く〉を選ぶと、精神病院の廊下が現れた。

夜の談話室に、井枝尼理出亜が座っていた。白衣は着ていない。医師でも看護師でも、誰かの救済者でもなかった。

「私を治しに来たのですか」

若い入院者が尋ねた。

「いいえ。あなたの言葉を、あなたより先に説明しないために来ました」

「答えを持っていないのですか」

「私は、答えを失いながら、あなたの前から立ち去らない人間です」

翌日、理出亜はカウンセリング室に現れた。

徹は、かつて病院で難病の子どもの母親から「あなたは優しくない」と言われた日のことを語った。制度を説明し、正しく手続きを進めても、目の前の苦しみに届かなかった。

「私は何を償えばいいのでしょう」

「償いを急げば、相手の苦しみまで自分の救済に使ってしまいます」

「では、何もしないのですか」

「答えを急がないことと、責任を引き受けないことは同じではありません」

その夜、〈零番地――話さなくてもよい部屋〉というオープンチャットが開かれた。

《眠れません》
《家族には感謝している。でも帰りたくない》
《理由を説明できません》
《読むだけでいたい》

理出亜は最後の言葉に答えた。

《読んでいるだけでかまいません。ここにいる証明も必要ありません》

やがて、井枝尼理出亜を名乗るアカウントが百を超えた。女も男も、若者も老人も、労働者も患者も同じ名を名乗った。

本物が誰かという問いは、意味を失った。

理出亜が剣を抜いたとき、彼女が切り裂いたのは人間ではなかった。

声を病名だけで分類する仕組み。沈黙を同意として処理する制度。弱った人間を商品へ変えるアルゴリズム。支援者を救世主にし、支援される者から選ぶ力を奪う構造だった。

夜明け前、すべての井枝尼理出亜がチャットから消えた。

「あなたは、どこにいるのですか」

徹が尋ねると、文字だけの返事が届いた。

《人が他者の苦しみを所有せず、それでも見捨てないと決める。その関係の中にいます》

世界は救われていなかった。

病も、制度の壁も、資本の冷たさも残っていた。

それでも零番地から、小さな合唱が始まった。

声をそろえるためではない。黙る者の余白を守り、途切れた息を待つための合唱だった。

その中心に、井枝尼理出亜はいなかった。

だからこそ彼女は、どこにでも現れることができた。

### English

# Iena Ridea

## The Woman Who Appeared at Address Zero

When Toru first drew Iena Ridea, she was nothing more than an image.

Long black hair. The profile of an ancient queen. The weariness of an actress who had just left the stage. At her feet lay a battered Bible and a copy of *Capital*.

Toru posted the image online, and Iena slipped beyond his control.

She appeared in factories, schools, courts, harbors, mountain villages, churches, and underground online games. People in different countries assumed her name. Before long, Iena Ridea seemed to exist everywhere.

One night, a black point appeared on Toru’s digital map. It belonged to no nation.

It was labeled “Address Zero.”

It was neither the developed world nor the Third World. It was an unmapped territory inhabited by those who could not sleep in prosperous cities, those who had lost their voices after escaping war, and those who had been helped by a diagnosis yet imprisoned within its name.

Four choices appeared on the screen:

FIGHT
LOVE
PLAY MUSIC
LISTEN

Toru selected LISTEN.

A corridor in a psychiatric hospital appeared.

Iena sat in the corner of the night lounge. She wore no white coat. She was neither a doctor nor a nurse, and she did not claim to be anyone’s savior.

“Have you come to cure me?” a young patient asked.

“No. I have come so that I will not explain your words before you can speak them yourself.”

“Then you do not have the answer?”

“I am someone who has lost the answer, yet refuses to walk away from you.”

The following day, Iena appeared in a counseling room.

Toru spoke about the day when the mother of a seriously ill child had told him, “You are not kind.” He had explained the system correctly and completed the procedures, yet he had failed to reach the suffering before him.

“What must I do to make amends?” he asked.

“If you hurry toward atonement, you may use another person’s suffering to save yourself.”

“Should I do nothing, then?”

“Refusing to rush toward an answer is not the same as refusing responsibility.”

That night, an open chat room appeared:

“Address Zero — A Room Where You Do Not Have to Speak.”

Messages crossed languages and borders.

“I cannot sleep.”

“I am grateful to my family, but I do not want to go home.”

“I cannot explain why.”

“I only want to read.”

Iena replied to the final message:

“You may remain only as a reader. You do not have to prove that you are here.”

Soon, more than a hundred accounts were using the name Iena Ridea. Women and men, young people and elders, workers and patients all shared it.

The question of which one was real lost its meaning.

When Iena drew her sword, she did not attack a human being.

She struck at systems that reduced voices to diagnoses, rules that treated silence as consent, algorithms that turned vulnerable people into commodities, and structures that transformed helpers into saviors while taking choice away from those receiving help.

Before dawn, every account bearing Iena’s name disappeared.

“Where are you?” Toru asked.

Only a line of text returned:

“I exist within the relationship formed when one person refuses to possess another’s suffering and still chooses not to abandon them.”

The world had not been saved.

Illness remained. Institutional walls remained. The coldness of capital remained.

Yet a small chorus began at Address Zero.

It was not a chorus meant to make every voice sound the same. It protected the silence of those who could not speak and waited for interrupted breath to return.

Iena Ridea was not standing at its center.

That was why she could appear everywhere.

### 简体中文

# 井枝尼理出亚

## 出现在零号地址的女人

彻最初画下井枝尼理出亚时,她还只是一幅画。

乌黑的长发,古代女王般的侧脸,以及刚刚走下舞台的女演员所带着的疲惫。她的脚边放着一本破旧的《圣经》和一部《资本论》。

彻把这幅画发布到社交网络之后,理出亚便脱离了他的手。

她出现在工厂、学校、法院、港口、山村、教堂和地下网络游戏中。不同国家的人开始使用她的名字。井枝尼理出亚仿佛出现在世界的每一个角落。

一天夜里,彻的电子地图上出现了一个不属于任何国家的黑点。

它的名字是“零号地址”。

那里既不是发达世界,也不是第三世界。居住在那里的是在繁华都市中无法入睡的人、逃离战争后失去声音的人,以及因诊断而得到帮助,却又被诊断名称囚禁的人。

屏幕上出现了四个选项:

〈战斗〉
〈爱〉
〈演奏〉
〈倾听〉

彻选择了〈倾听〉。

精神病院的走廊随即出现在屏幕上。

夜晚的休息室里,井枝尼理出亚静静地坐着。她没有穿白大褂。她不是医生,不是护士,也不愿成为任何人的救世主。

“你是来治好我的吗?”一个年轻患者问。

“不是。我来这里,是为了不在你开口之前替你解释你的话。”

“那么,你没有答案吗?”

“我是一个失去了答案,却不愿从你面前离开的人。”

第二天,理出亚出现在心理咨询室。

彻讲述了自己曾在医院工作时的经历。一位重病儿童的母亲曾对他说:“你一点也不温柔。”他正确地解释了制度,也完成了手续,却没有触及眼前的痛苦。

“我要怎样才能赎罪?”

“如果急于赎罪,你可能会把别人的痛苦也变成拯救自己的工具。”

“那么,我什么都不应该做吗?”

“不急于给出答案,并不等于拒绝承担责任。”

当天深夜,一个名为“零号地址——不说话也可以的房间”的开放聊天室出现了。

“我睡不着。”

“我感谢家人,但我不想回家。”

“我无法解释原因。”

“我只想静静地看。”

理出亚回复了最后一条信息:

“只看也没有关系。你不必证明自己在这里。”

不久,使用井枝尼理出亚之名的账号超过了一百个。女人、男人、年轻人、老人、工人和患者都使用着同一个名字。

谁才是真正的理出亚,这个问题逐渐失去了意义。

当理出亚拔出剑时,她没有攻击任何人。

她斩向的是把人的声音简化为诊断的体制,把沉默当成同意的规则,把脆弱者变成商品的算法,以及把援助者塑造成救世主、却夺走求助者选择权的结构。

黎明之前,所有名为井枝尼理出亚的账号同时消失了。

“你究竟在哪里?”彻问。

屏幕上只出现了一行文字:

“当一个人不占有他人的痛苦,却仍然决定不抛弃对方时,我就在这种关系之中。”

世界并没有因此得到拯救。

疾病依然存在,制度的高墙依然存在,资本的寒冷也依然存在。

然而,一支小小的合唱从零号地址开始了。

那不是为了让所有声音变得一致。它守护不能说话者的沉默,也等待中断的呼吸重新开始。

井枝尼理出亚并不站在合唱的中心。

正因如此,她才能出现在任何地方。

### हिन्दी

# इएना रिदेआ

## शून्य पते पर प्रकट हुई स्त्री

जब तोरू ने पहली बार इएना रिदेआ का चित्र बनाया, तब वह केवल एक छवि थी।

लंबे काले बाल, किसी प्राचीन रानी जैसा चेहरा और मंच से उतर चुकी अभिनेत्री की थकान। उसके पैरों के पास एक पुरानी, फटी हुई बाइबिल और *दास कैपिटल* रखी थी।

तोरू ने चित्र को सोशल मीडिया पर साझा किया। उसी क्षण इएना उसके हाथों से निकल गई।

वह कारखानों, विद्यालयों, अदालतों, बंदरगाहों, पहाड़ी गांवों, गिरजाघरों और गुप्त ऑनलाइन खेलों में दिखाई देने लगी। अलग-अलग देशों के लोग उसका नाम अपनाने लगे। शीघ्र ही ऐसा लगने लगा कि इएना रिदेआ हर जगह मौजूद है।

एक रात तोरू के डिजिटल मानचित्र पर एक काला बिंदु दिखाई दिया। वह किसी भी देश का भाग नहीं था।

उसका नाम था—“शून्य पता।”

वह न विकसित विश्व था, न तीसरी दुनिया। वह उन लोगों का अदृश्य प्रदेश था जो समृद्ध नगरों में भी सो नहीं पाते थे; जो युद्ध से बच निकलने के बाद अपनी आवाज खो चुके थे; और जिन्हें किसी मानसिक निदान से सहायता तो मिली थी, पर वही नाम उनकी जेल बन गया था।

स्क्रीन पर चार विकल्प प्रकट हुए:

〈लड़ना〉
〈प्रेम करना〉
〈संगीत बजाना〉
〈सुनना〉

तोरू ने 〈सुनना〉 चुना।

स्क्रीन पर एक मनोरोग अस्पताल का गलियारा उभर आया।

रात के विश्राम-कक्ष में इएना बैठी थी। उसने सफेद कोट नहीं पहना था। वह न डॉक्टर थी, न नर्स, और न ही किसी की उद्धारकर्ता बनने आई थी।

“क्या तुम मुझे ठीक करने आई हो?” एक युवा रोगी ने पूछा।

“नहीं। मैं इसलिए आई हूं कि तुम्हारे बोलने से पहले तुम्हारे शब्दों की व्याख्या न कर दूं।”

“तो तुम्हारे पास उत्तर नहीं है?”

“मैं वह मनुष्य हूं जिसने उत्तर खो दिया है, फिर भी तुम्हारे सामने से हटने से इनकार करती हूं।”

अगले दिन इएना परामर्श-कक्ष में दिखाई दी।

तोरू ने उस दिन के बारे में बताया जब एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे की मां ने उससे कहा था, “आप दयालु नहीं हैं।” उसने नियमों को सही ढंग से समझाया था और सारी प्रक्रिया पूरी की थी, फिर भी वह सामने उपस्थित पीड़ा तक नहीं पहुंच सका था।

“मैं अपने अपराध का प्रायश्चित कैसे करूं?” उसने पूछा।

“यदि तुम प्रायश्चित के लिए जल्दी करोगे, तो संभव है कि दूसरे की पीड़ा को भी अपने उद्धार का साधन बना लो।”

“तो क्या मुझे कुछ नहीं करना चाहिए?”

“उत्तर देने में जल्दबाजी न करना और जिम्मेदारी से भागना एक ही बात नहीं है।”

उस रात एक खुला चैट-कक्ष बना:

“शून्य पता—वह कमरा जहां बोलना आवश्यक नहीं है।”

“मुझे नींद नहीं आती।”

“मैं अपने परिवार की आभारी हूं, फिर भी घर नहीं लौटना चाहती।”

“मैं कारण नहीं समझा सकती।”

“मैं केवल पढ़ना चाहती हूं।”

इएना ने अंतिम संदेश का उत्तर दिया:

“केवल पढ़ते रहना भी पर्याप्त है। तुम्हें यह प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं कि तुम यहां उपस्थित हो।”

कुछ ही समय में सौ से अधिक खातों ने इएना रिदेआ का नाम अपना लिया। स्त्रियां, पुरुष, युवा, वृद्ध, श्रमिक और रोगी—सब उसी नाम से बोलने लगे।

कौन असली इएना है, यह प्रश्न अपना अर्थ खो बैठा।

जब इएना ने तलवार निकाली, उसने किसी मनुष्य पर प्रहार नहीं किया।

उसने उन व्यवस्थाओं पर वार किया जो प्रत्येक आवाज को केवल एक रोग-नाम में बदल देती थीं; उन नियमों पर जो मौन को सहमति मान लेते थे; उन एल्गोरिदमों पर जो कमजोर लोगों को वस्तु बना देते थे; और उन संरचनाओं पर जो सहायता देने वाले को उद्धारकर्ता बनाकर सहायता पाने वाले से चुनाव का अधिकार छीन लेती थीं।

भोर से पहले इएना के नाम वाले सभी खाते गायब हो गए।

“तुम कहां हो?” तोरू ने पूछा।

स्क्रीन पर केवल एक उत्तर आया:

“जब कोई मनुष्य दूसरे की पीड़ा पर अधिकार किए बिना भी उसे न छोड़ने का निर्णय करता है, मैं उसी संबंध में उपस्थित होती हूं।”

दुनिया बचाई नहीं गई थी।

बीमारी बाकी थी। संस्थाओं की दीवारें बाकी थीं। पूंजी की ठंडक भी बाकी थी।

फिर भी शून्य पते से एक छोटा-सा सामूहिक गीत उठने लगा।

वह सभी आवाजों को एक जैसा बनाने वाला गीत नहीं था। वह न बोल सकने वालों के मौन की रक्षा करता था और टूटी हुई सांस के लौटने की प्रतीक्षा करता था।

इएना रिदेआ उस गीत के केंद्र में नहीं थी।

इसीलिए वह हर जगह प्रकट हो सकती थी।

### العربية

# إيينا ريديا

## المرأة التي ظهرت في العنوان صفر

عندما رسم تورو إيينا ريديا للمرة الأولى، لم تكن سوى صورة.

شعر أسود طويل، وملامح ملكة قديمة، وإرهاق ممثلة غادرت المسرح للتو. وعند قدميها كان هناك كتاب مقدس مهترئ ونسخة من كتاب *رأس المال*.

نشر تورو الصورة على وسائل التواصل الاجتماعي، فانفلتت إيينا من يديه.

ظهرت في المصانع والمدارس والمحاكم والموانئ والقرى الجبلية والكنائس وألعاب الإنترنت السرية. وبدأ أشخاص من بلدان مختلفة يحملون اسمها. وسرعان ما بدا أن إيينا ريديا موجودة في كل مكان.

في إحدى الليالي ظهرت نقطة سوداء على خريطة تورو الرقمية. لم تكن تابعة لأي دولة.

كان اسمها «العنوان صفر».

لم تكن من العالم المتقدم ولا من العالم الثالث. كانت أرضاً غير مرسومة يسكنها من لا يستطيعون النوم في المدن الغنية، ومن فقدوا أصواتهم بعد الهرب من الحرب، ومن ساعدهم التشخيص النفسي ثم تحول اسم ذلك التشخيص إلى سجن لهم.

ظهرت على الشاشة أربعة اختيارات:

〈القتال〉
〈الحب〉
〈العزف〉
〈الإصغاء〉

اختار تورو 〈الإصغاء〉.

فظهر ممر داخل مستشفى للأمراض النفسية.

كانت إيينا جالسة في زاوية صالة المرضى الليلية. لم تكن ترتدي معطفاً أبيض. لم تكن طبيبة ولا ممرضة، ولم تأت لتصبح مخلّصة لأحد.

سألها مريض شاب:

«هل جئت لتعالجيني؟»

قالت:

«لا. جئت كيلا أفسر كلماتك قبل أن تتمكن أنت من قولها.»

«إذن ليست لديك الإجابة؟»

«أنا إنسانة فقدت الإجابة، لكنها ترفض أن تبتعد عنك.»

في اليوم التالي ظهرت إيينا في غرفة للاستشارة النفسية.

تحدث تورو عن يوم قالت له فيه أم طفل مصاب بمرض خطير: «أنت لست رحيماً.» كان قد شرح النظام بصورة صحيحة، وأنجز الإجراءات المطلوبة، لكنه لم يصل إلى الألم الموجود أمامه.

سألها:

«ماذا يجب أن أفعل لأكفّر عن ذلك؟»

قالت:

«إذا استعجلت التكفير، فقد تجعل من معاناة الآخر وسيلة لخلاصك أنت.»

«هل ينبغي لي ألا أفعل شيئاً؟»

«عدم التسرع في تقديم الإجابة لا يعني التخلي عن المسؤولية.»

في تلك الليلة ظهرت غرفة محادثة مفتوحة تحمل اسم:

«العنوان صفر—غرفة لا يجب عليك أن تتكلم فيها.»

عبرت الرسائل اللغات والحدود:

«لا أستطيع النوم.»

«أنا ممتن لعائلتي، لكنني لا أريد العودة إلى البيت.»

«لا أستطيع تفسير السبب.»

«أريد فقط أن أقرأ.»

أجابت إيينا عن الرسالة الأخيرة:

«يمكنك أن تبقى قارئاً فقط. لست مضطراً إلى إثبات وجودك هنا.»

بعد وقت قصير أصبح أكثر من مئة حساب يحمل اسم إيينا ريديا. نساء ورجال، شباب ومسنون، عمال ومرضى—جميعهم تكلموا بالاسم نفسه.

وفقد سؤال «من هي إيينا الحقيقية؟» معناه.

عندما استلت إيينا سيفها، لم تهاجم إنساناً.

ضربت الأنظمة التي تختزل أصوات الناس في أسماء الأمراض، والقواعد التي تعامل الصمت بوصفه موافقة، والخوارزميات التي تحول الضعفاء إلى سلع، والبنى التي تجعل من المساعد مخلّصاً وتسلب ممن يتلقى المساعدة حق الاختيار.

وقبل الفجر اختفت جميع الحسابات التي تحمل اسم إيينا.

سأل تورو:

«أين أنت؟»

ظهر على الشاشة جواب واحد:

«أنا موجودة في العلاقة التي تنشأ عندما يرفض إنسان امتلاك معاناة إنسان آخر، ويقرر مع ذلك ألا يتخلى عنه.»

لم يُنقذ العالم.

ظل المرض موجوداً. وظلت جدران المؤسسات قائمة. وظلت برودة رأس المال حاضرة.

ومع ذلك بدأ من العنوان صفر صوت جوقة صغيرة.

لم تكن جوقة تجعل الأصوات كلها متشابهة. كانت تحمي صمت من لا يستطيعون الكلام، وتنتظر عودة الأنفاس المنقطعة.

لم تكن إيينا ريديا واقفة في مركز الجوقة.

ولهذا السبب استطاعت أن تظهر في كل مكان.
posted by 赤い公爵 at 15:01| 神奈川 ☁| Comment(0) | 井枝尼 理出亜 | このブログの読者になる | 更新情報をチェックする
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